
Aye Khuda Kshitij Tarey, Saim Bhat & Mithoon
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कैसी ख़ला ये दिल में बसी है?
अब तो ख़ताएँ फ़ितरत ही सी हैं
मैं ही हूँ वो जो रहमत से गिरा
ऐ खुदा, गिर गया, गिर गया
मैं जो तुझ से दूर हुआ, लुट गया, लुट गया
ऐ खुदा, गिर गया, गिर गया
मैं जो तुझ से दूर हुआ, लुट गया, लुट गया
कैसी ख़ला ये दिल में बसी है?
अब तो ख़ताएँ फ़ितरत ही सी हैं
मैं ही हूँ वो जो रहमत से गिरा
ऐ खुदा, गिर गया, गिर गया
मैं जो तुझ से दूर हुआ, लुट गया, लुट गया
ऐ खुदा
इतनी ख़ताएँ तू लेकर चला है
दौलत ही जैसे तेरा अब खुदा
हर पल बिताए तू जैसे हवा है
गुनाह के साए में चलता रहा
समंदर सा बहकर तू चलता ही गया
तेरी मर्ज़ी पूरी की तूने, हाँ, हर दफ़ा
तू ही तेरा मुजरिम, बंदेया
अब तो ख़ताएँ फ़ितरत ही सी हैं
मैं ही हूँ वो जो रहमत से गिरा
ऐ खुदा, गिर गया, गिर गया
मैं जो तुझ से दूर हुआ, लुट गया, लुट गया
ऐ खुदा, गिर गया, गिर गया
मैं जो तुझ से दूर हुआ, लुट गया, लुट गया
कैसी ख़ला ये दिल में बसी है?
अब तो ख़ताएँ फ़ितरत ही सी हैं
मैं ही हूँ वो जो रहमत से गिरा
ऐ खुदा, गिर गया, गिर गया
मैं जो तुझ से दूर हुआ, लुट गया, लुट गया
ऐ खुदा
इतनी ख़ताएँ तू लेकर चला है
दौलत ही जैसे तेरा अब खुदा
हर पल बिताए तू जैसे हवा है
गुनाह के साए में चलता रहा
समंदर सा बहकर तू चलता ही गया
तेरी मर्ज़ी पूरी की तूने, हाँ, हर दफ़ा
तू ही तेरा मुजरिम, बंदेया
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