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Mulaqat - Prateek Kuhad
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Mulaqat Prateek Kuhad

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Mulaqat - Prateek Kuhad
[Chorus]
ये कैसी मुलाकात है
जैसे सदियों से तुम मेरी जान हो
अब कैसे मैं ये समझाऊँ
कितने अरसों से तुम्हारा ही मुझे
इंतज़ार है

[Hook]
हो हो हो हो हो
हो हो हो हो हो
हो हो हो हो हो
हो हो हो हो हो

[Verse 1]
तुम जो पास आई
चूमने का यूँ बहाना लेके
तब से तुम मेरी हो दास्तान
चाँद को बुलाकर
तुमने चमकाई मेरी जो रातें
तब से मैं तुम्हारा ही हुआ
दोनों ही कलाईयों पे
चांदी है सजी
होठों पे जो लाली है
दिल में बस गई
ये मिलन कैसी आग है
जल जाने की ही आस है
मदहोशी हो या ना भी हो
इस प्यार की गहराई का कोई
इंतेहां नहीं
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