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Jagaao Mere Des Ko - A.R. Rahman
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Jagaao Mere Des Ko A.R. Rahman

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Jagaao Mere Des Ko - A.R. Rahman
[Verse 1: A. R. Rahman, A. R. Rahman & Suchi and Suchi]
চিত্ত যেথা ভয়শূন্য, উচ্চ যেথা শির
জ্ঞান যেথা মুক্ত, যেথা গৃহের প্রাচীর
জ্ঞান যেথা মুক্ত, যেথা গৃহের প্রাচীর
আপন প্রাঙ্গণতলে দিবসশর্বরী
বসুধারে রাখে নাই খন্ড ক্ষুদ্র করি
যেথা বাক্য হৃদয়ের উৎসমুখ হতে, উচ্ছ্বসিয়া উঠে
যেথা নির্বারিত স্রোতে দেশে, দেশে, দিশে, দিশে কর্মধারা ধায়
অজস্র সহস্রবিধ চরিতার্থতায়
যেথা তুচ্ছ আচারের মরুবালুরাশি
বিচারের স্রোতঃপথ ফেলে নাই গ্রাসি
পৌরুষেরে করেনি শতধা, নিত্য যেথা
তুমি সর্ব কর্ম চিন্তা আনন্দের নেতা
নিজ হস্তে নির্দয় আঘাত করি, পিতঃ
ভারতেরে সেই স্বর্গে করো জাগরিত
जगाओ मेरे देश, जगाओ मेरे देश (जगाओ मेरे देश)

[Verse 2: A. R. Rahman & Suchi]
मन में भय की बूँद भी ना हो माथा ऊचा लेहराए
ज्ञान मुक्त आज़ाद ले सांसें
धरती बट ना पाए, होधरती बट ना पाए
सच की कोख से शब्द जन्म ले
कर्म की धारा कल-कल
बोने रेगिस्तान चीर दे नदी विचार की छल-छल
चौड़ा सीना हो अभिमान का ना हो टुकड़े-टुकड़े
भाव सुरीले बंदिश में हो और सुरीले मुखड़े
प्रहार करो, प्रहार करो
जगाओ मेरे देश, जगाओ मेरे देश, जगाओ मेरे देश
जगाओ मेरे देश को, जगाओ मेरे देश को, जगाओ मेरे देश
मन में भय की बूँद भी ना हो माथा ऊचा लेहराए
जगाओ मेरे देश को, जगाओ मेरे देश
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