
O’meri Laila Atif Aslam & Jyotica Tangri
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पत्ता अनारों का, पत्ता चनारों का जैसे हवाओं में
ऐसे भटकता हूँ, दिन-रात दिखता हूँ मैं तेरी राहों में
मेरे गुनाहों में, मेरे सवाबों में शामिल तू
भूली अठन्नी सी बचपन के कुर्ते में से मिल तू
रखूँ छुपा के मैं सब से, ओ, लैला
माँगूँ ज़माने से, रब से, ओ, लैला
कब से मैं तेरा हूँ, कब से तू मेरी, लैला
तेरी तलब थी, हाँ, तेरी तलब है
तू ही तो सब थी, हाँ, तू ही तो सब है
कब से मैं तेरा हूँ, कब से तू मेरी, लैला
ओ, मेरी लैला, लैला, ख़्वाब तू है पहला
कब से मैं तेरा हूँ, कब से तू मेरी, लैला
ओ, मेरी लैला, लैला, ख़्वाब तू है पहला
कब से मैं तेरा हूँ, कब से तू मेरी, लैला
माँगी थीं दुआएँ जो
उनका ही असर है, हम साथ हैं
ना यहाँ दिखावा है
ना यहाँ दुनियावी जज़्बात हैं
यहाँ पे भी तू हूरों से ज़्यादा हसीं
यानी, दोनों जहानों में तुम सा नहीं
जीत ली हैं आख़िर में हम दोनों ने ये बाज़ियाँ
ऐसे भटकता हूँ, दिन-रात दिखता हूँ मैं तेरी राहों में
मेरे गुनाहों में, मेरे सवाबों में शामिल तू
भूली अठन्नी सी बचपन के कुर्ते में से मिल तू
रखूँ छुपा के मैं सब से, ओ, लैला
माँगूँ ज़माने से, रब से, ओ, लैला
कब से मैं तेरा हूँ, कब से तू मेरी, लैला
तेरी तलब थी, हाँ, तेरी तलब है
तू ही तो सब थी, हाँ, तू ही तो सब है
कब से मैं तेरा हूँ, कब से तू मेरी, लैला
ओ, मेरी लैला, लैला, ख़्वाब तू है पहला
कब से मैं तेरा हूँ, कब से तू मेरी, लैला
ओ, मेरी लैला, लैला, ख़्वाब तू है पहला
कब से मैं तेरा हूँ, कब से तू मेरी, लैला
माँगी थीं दुआएँ जो
उनका ही असर है, हम साथ हैं
ना यहाँ दिखावा है
ना यहाँ दुनियावी जज़्बात हैं
यहाँ पे भी तू हूरों से ज़्यादा हसीं
यानी, दोनों जहानों में तुम सा नहीं
जीत ली हैं आख़िर में हम दोनों ने ये बाज़ियाँ
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